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श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी गया नेतृत्व में धावा दल ने 3 बाल श्रमिकों को कराया मुक्त

Gaya (मनीष कुमार): गया सहायक श्रम आयुक्त पुनम कुमारी के निर्देश पर सोमवार को श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी गया सदर राम प्रकाश के नेतृत्व में मगध मेडिकल थाना क्षेत्र एवं श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी शेरघाटी अंतर्गत धावा दल के द्वारा सघन जांच की गई। इस दौरान मगध मेडिकल के नजदीक स्थित से दो बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया।

वहीं, शेरघाटी थाना के नजदीक ब्लॉक रोड में स्थित अपना फैमिली रेस्टोरेंट से एक बाल श्रमिक को विमुक्त कराया गया। धावा दल के नेतृत्व कर्ता ने बताया कि बाल श्रमिकों को मुक्त करवाने का कार्य नियमित रूप से चलाया जायेगा ताकि बच्चो से मजदूरी नहीं कराया जाय।

बाल श्रम उन्मूलन के लिए बने कानून “बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986” के तहत दोनो प्रतिष्ठान के नियोजक मदन सिंह एवं राहुल कुमार के विरूद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज करने हेतु धावा दल द्वारा आवेदन दिया गया है जबकि विमुक्त तीनों बाल श्रमिक को बाल कल्याण समिति गया के समक्ष उपस्थापित कर समिति के आदेश से उसे बाल गृह में रखा गया है।

इस मौके पर श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बाराचट्टी नितेश कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मानपुर मनीष कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बोधगया गौतम कुमार सिंह, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी टेकारी रोहित कुमार के अलावें प्रयास संस्था गया के कार्यकर्ता विनोद कुमार, अजीत कुमार, मोहम्मद आलमगीर के साथ शेरघाटी एवं मगध मेडिकल थाना की पुलिस कर्मी की टीम शामिल रहे।

इस मौके पर प्रयास संस्था के जिला समन्वयक देवेन्द्र कुमार मिश्रा एवं कार्यकर्ता गौतम परमार ने बताया कि श्रम विभाग एवं संस्था द्वारा नियमित रूप से बाल श्रम ना करवाने हेतु नियोजकों को जागरूक किया जाता है एवं ऐसा ना होने पर विभाग द्वारा बाल श्रमिकों को विमुक्त करवाकर नियोजकों पर मुकदमा दायर किया जाता है।।विमुक्त बाल श्रमिकों के पुनर्वास हेतु कार्य किया जाता है। उन्होंने बताया कि बाल मजदूरी करवाना हमारे समाज को कलंकित करती है। यह कानूनन जुर्म है। बाल श्रम करवाने वाले को 20 से 50 हजार रूपये का जुर्माना एवं 1 से 6 माह तक जेल की सजा अथवा दोनों से दंडित किया जाता है।

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